अनुभव

 


हमारे जीवन में जो कुछ होता है या हमारे आसपास जो कुछ होता है वह हमारे समझ में कैसे आता है?

हम इस समझने को ही अनुभव कहते है। अनुभव का मतलब है जो भी घटनाए होती है उसको हमारे स्मृतिमे (memory) संचयन किया जाता है। संचयन करने के लिए हर घटना की छोटी छोटी प्रतिमाएं बनाई जाती है। इन प्रतिमा को बनाने के लिए विचार करना अनिवार्य होता है। हमारा सम्मान, अपमान, आनंद, दुख, परेशानियां ऐसे सभी अनुभवसे प्रतिमाएं हमेशा बनती रहती है। 

हमारा दूसरे इन्सान से जो भी रिश्ता बनता है वह इन्ही प्रतिमासे बनता है। सभी रिश्ते प्रतिमासे बनते हैं!!!

जब कोई विचार करता ही नही तो कोई प्रतिमा नही बनेगी।

अगर किसी ने हमारा सम्मान किया या अपमान किया फिर भी हमने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो उसके बारे में विचार नहीं होंगे और प्रतिमाएं नही बनेगी, स्मृति रिक्त रहेगी। 

जब कोई प्रतिमा और कोई स्मृति नही रहेगी तभी सही संबंध प्रस्थापित होंगे। यह प्रत्यक्ष होनेवाला संबंध हमारे स्मृति और प्रतिमासे नही होगा। 

प्रतिमा और स्मृति भूतकाल होती है। वर्तमान को वह जैसा भी हो वैसेही उसमें रहने के लिए हमे भूतकाल को भूलना आवश्यक है। हम और हमारा वर्तमान के बीचमे भूतकाल को निकाल दे तो हम हमेशा सत्य अवस्था में ही जिएंगे।




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